This is one of my few Hindi poems that are a little serious, I also saw this new feature that blogger has that lets u write in the script so here goes:
न्यी यादें
कुछ बातें अन कही हुई
कुछ पल छूटे हुए
कुछ यादें हैं जो साथ में हैं
और कुछ साथ हैं भूले हुए
कई लोग आते जाते हैं
कुछ अपनी बात छोड़ जाते हैं
कुछ छूट्टी हुई इन यादों से
कुछ लम्हे वापस आते हैं
आए हुए इन यादों के
साये में पल गुज़र जाते हैं
इन गुज़रे हुए पलों में
एक ज़िन्दगी सी रहती है
जीयों इस ज़िंदगी को इस ज़िन्दगी में
ये ज़िन्दगी मुझ से कहती है
कनिष्क कक्कर
३१/१/२००७
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